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दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ इंसान जनà¥à¤® लेने से पहले नौ महीने अपनी माठकी गरà¥à¤ में समय वà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ करता है। बचà¥à¤šà¥‡ जब माठके गरà¥à¤ में पहली बार आता है तो माठउस बचà¥à¤šà¥‡ के इस मृतà¥à¤¯à¥ लोक में आने से पहले ही कई सपने बà¥à¤¨à¤¨à¥‡ लगती है लेकिन कà¥à¤¯à¤¾ आप जानते है की बचà¥à¤šà¤¾ अपने माठके गरà¥à¤ में कà¥à¤¯à¤¾ सोचता है और उसे गरà¥à¤ में कà¥à¤¯à¤¾ सजा à¤à¥‹à¤—नी पड़ती है ? जैसा कि गरà¥à¤¡à¤¼ पà¥à¤°à¤¾à¤£ में जीवन-मृतà¥à¤¯à¥, सà¥à¤µà¤°à¥à¤—, नरक, पाप-पà¥à¤£à¥à¤¯, मोकà¥à¤· पाने के उपाय आदि के साथ ही यह à¤à¥€ बताया गया है कि शिशॠको माता के गरà¥à¤ में कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ कषà¥à¤Ÿ à¤à¥‹à¤—ने पड़ते हैं और वह किस पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤—वान का सà¥à¤®à¤°à¤£ करता है। शिशॠमां के गरà¥à¤ में कà¥à¤¯à¤¾ महसूस करता है, उस समय उसके मन à¤à¤µà¤‚ मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ बातें चलती हैं।
अकाल मृतà¥à¤¯à¥ के बाद आतà¥à¤®à¤¾ का कà¥à¤¯à¤¾ होता है ? – जानने के लिठयहां कà¥à¤²à¤¿à¤• करें।
गरà¥à¤¡à¤¼ पà¥à¤°à¤¾à¤£ के धरà¥à¤®à¤•ांड के पà¥à¤°à¥‡à¤¤à¤•लà¥à¤ª अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में पकà¥à¤·à¥€à¤°à¤¾à¤œ गरà¥à¤¡à¤¼ जब à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ से पूछते हैं की हे पà¥à¤°à¤à¥‹ जब कोई आतà¥à¤®à¤¾ दूसरा शरीर धारण करने से पहले अपनी माठके गरà¥à¤ में होता है तो वह कैसा महसूस करता है कृपया मà¥à¤à¥‡ विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताइये। तब à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ गरà¥à¤¡à¤¼ से कहते हैं की हे गरà¥à¤¡à¤¼ गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ जीव को अपने पूरà¥à¤µà¤œà¤¨à¥à¤®à¥‹à¤‚ का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ रहता है,वह वहां सà¥à¤®à¤°à¤£ करता है कि आयॠके समापà¥à¤¤ होने पर शरीर का परितà¥à¤¯à¤¾à¤— करके अब मैं मलादि में रहनेवाले छोटे-छोटे कृमि या कीटाणà¥à¤“ं की à¤à¤• विशेष योनि में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हूà¤,पहले मैं सरककर चलने वाले सरà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿ की योनि में पहà¥à¤‚चा,फिर मचà¥à¤›à¤° हो गया था,उसके बाद चार पैरोंवाला अà¤à¥à¤° या वृषठनामक पशॠबन गया था अथवा जंगली सà¥à¤•र की योनि में पà¥à¤°à¤µà¤¿à¤·à¥à¤Ÿ था। इस पà¥à¤°à¤•ार गरà¥à¤ में रहते हà¥à¤ उस जीवातà¥à¤®à¤¾ को पूरà¥à¤£ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ रहता है,किनà¥à¤¤à¥ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होते ही वह ततà¥à¤•ाल उसे à¤à¥‚ल जाता है। उसे याद आता है कि मैं दूसरे को चलने का विचार करता रहा। मैंने शरीर की रकà¥à¤·à¤¾ के लिये धरà¥à¤® का परितà¥à¤¯à¤¾à¤— करके दà¥à¤¯à¥‚त,छल-कपट और चोरवृति का आशà¥à¤°à¤¯ लिया।
फिर गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ जीवको याद आता है की उसने अपने पिछले जनà¥à¤® में अतà¥à¤¯à¤‚त कषà¥à¤Ÿ से सà¥à¤µà¤‚य लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ को à¤à¤•तà¥à¤° किया था,किनà¥à¤¤à¥ अà¤à¤¿à¤²à¤·à¤¿à¤¤ धन का उपà¤à¥‹à¤— वह नहीं कर सका। और अगà¥à¤¨à¤¿à¤¦à¥‡à¤µ,अतिथि और बंधू-बांधवों को सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ अनà¥à¤¨,फल,गोरस तथा तामà¥à¤¬à¥‚ल दे करके मैं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ करने में असफल रहा। फिर गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ जीव को याद आता है की इस पृथà¥à¤µà¥€ पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ तà¥à¤°à¤¿à¤µà¤¿à¤•à¥à¤°à¤® à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ का दरà¥à¤¶à¤¨ मैंने नहीं किया,उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ नहीं किया और न तो उनकी पूजा की है। पà¥à¤°à¤à¤¾à¤¸à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में विराजमान à¤à¤—वान सोमनाथ की à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• पूजा à¤à¤µà¤‚ वंदना à¤à¥€ मेरे दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नहीं हà¥à¤ˆ है। जब à¤à¤¸à¥€ चिंता गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ जीव करता है,तब यमदूत उससे कहते हैं की हे देहधारिन ! जैसा तà¥à¤®à¤¨à¥‡ किया है,उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अपना निसà¥à¤¤à¤¾à¤° करो।
फिर माठके गरà¥à¤ में पल रहा जीव सà¥à¤®à¤°à¤£ करता हà¥à¤† अपने को कोसते हà¥à¤ कहता है की तà¥à¤®à¤¨à¥‡ अपनी कमायी से जो धन अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ किया था,उसमे से किसी को दान नहीं दिया। पृथà¥à¤µà¥€ पर रहते हà¥à¤ तà¥à¤®à¤¨à¥‡ à¤à¥‚मिदान,गोदान, जलदान,फलदान,तामà¥à¤¬à¥‚लदान अथवा गंधदान à¤à¥€ नहीं किया तो अब à¤à¤²à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ सोच रहे हो ? तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पिता और पितामह मर गà¤,जिसने तà¥à¤®à¤•ो अपने गरà¥à¤ में धारण किया वह तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ माता à¤à¥€ मर गयी,तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ सà¤à¥€ बंधू à¤à¥€ नहीं रहे,à¤à¤¸à¤¾ तà¥à¤®à¤¨à¥‡ देखा है। तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ पांचà¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• शरीर अगà¥à¤¨à¤¿ में जलाकर à¤à¤¸à¥à¤® हो गया। तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤•तà¥à¤° किया गया समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ धन-धानà¥à¤¯ पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ ने हसà¥à¤¤à¤—त कर लिया। जो कà¥à¤› तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ है और जो कà¥à¤› तà¥à¤®à¤¨à¥‡ धरà¥à¤®à¤¸à¤‚चय किया है,वह तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ साथ है। इस पृथà¥à¤µà¥€ पर जनà¥à¤® लेनेवाला राजा हो अथवा सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ या कोई शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ तम बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ हो,वह मरने के बाद पà¥à¤¨à¤ƒ आया हà¥à¤† नहीं दिखायी देता है। जो à¤à¥€ इस धरातल पर उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤† है,उसकी मृतà¥à¤¯à¥ निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ है।और इसके बाद वह विलाप करने लगता है। और वह à¤à¤—वान से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करता है की हे पà¥à¤°à¤à¥ जब जनà¥à¤® के बाद मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤¨à¤ƒ मृतà¥à¤¯à¥ को ही पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होना है तो फिर मेरा जनà¥à¤® कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ हो रहा है,अगर संà¤à¤µ हो तो मà¥à¤à¥‡ इस जीवन-मृतà¥à¤¯à¥ के चकà¥à¤° से मà¥à¤•à¥à¤¤ करिये।
गरà¥à¤¡à¤¼ पà¥à¤°à¤¾à¤£ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, फिर माता के गरà¥à¤ में पल रहा शिशॠà¤à¤—वान से कहता है कि मैं इस गरà¥à¤ से अलग होने की इचà¥à¤›à¤¾ नहीं करता कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बाहर जाने से पाप करà¥à¤® करने पड़ते हैं, जिससे नरक आदि पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होते हैं। इस कारण बड़े दà¥:ख से वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हूं फिर à¤à¥€ दà¥:ख रहित हो आपके चरण का आशà¥à¤°à¤¯ लेकर मैं आतà¥à¤®à¤¾ का संसार से उदà¥à¤§à¤¾à¤° करूंगा। माता के गरà¥à¤ में पूरे नौ महीने शिशॠà¤à¤—वान से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ ही करता है, लेकिन यह समय पूरा होते ही जब पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति के समय वायॠसे ततà¥à¤•ाल बाहर निकलता है, तो उसे कà¥à¤› याद नहीं रहता। साइंस के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मां के गरà¥à¤ से बाहर आने वाले शिशॠको काफी पीड़ा का सामना करना पड़ता है जिस कारण उसके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• पर काफी ज़ोर पड़ता है। शायद यही कारण है कि उसे कà¥à¤› à¤à¥€ याद नहीं रहता। लेकिन गरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤£ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति की हवा से जैसे ही शà¥à¤µà¤¾à¤¸ लेता हà¥à¤† शिशॠमाता के गरà¥à¤ से बाहर निकलता है तो उसे किसी बात का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ à¤à¥€ नहीं रहता। गरà¥à¤ से अलग होकर वह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ रहित हो जाता है, इसी कारण जनà¥à¤® के समय वह रोता है।
इन सबके आलावा गरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤£ में à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ ने ये à¤à¥€ बताया है की जब शिशॠगरà¥à¤ में छह मास का हो जाता है तो वह à¤à¥‚ख-पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ को महसूस करने लगता है और माता के गरà¥à¤ में अपना सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ बदलने के à¤à¥€ लायक हो जाता है, तब वह कà¥à¤› कषà¥à¤Ÿ à¤à¥€ à¤à¥‹à¤—ता है। माता जो à¤à¥€ खाने के रूप में गà¥à¤°à¤¹à¤£ करती है वह उसकी कोमल तà¥à¤µà¤šà¤¾ से होकर गà¥à¤œà¤°à¤¤à¤¾ है। और इन कषà¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ के कारण कई बार शिशॠमाता के गरà¥à¤ में ही बेहोश à¤à¥€ हो जाता है। छह मास के बाद शिशॠका मसà¥à¤¤à¤• नीचे की ओर तथा पैर ऊपर की ओर हो जाते हैं। à¤à¤¸ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में वह चाहकर à¤à¥€ इधर-उधर हिल नहीं सकता, वह खà¥à¤¦ को à¤à¤• पिंजरे में बंद कर दिठपकà¥à¤·à¥€ की तरह महसूस करता है। à¤à¤¸à¥‡ में शिशॠहाथ जोड़ कर ईशà¥à¤µà¤° की सà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ करने लगता है। और कहता है हे लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€à¤ªà¤¤à¤¿, जगदाधार, संसार को पालने वाले à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ का मैं शरणागत होता हूं। हे à¤à¤—वन! इस योनि से अलग हो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ चरणों का सà¥à¤®à¤°à¤£ कर फिर à¤à¤¸à¥‡ उपाय करूंगा, जिससे मैं मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकूं। इसके बाद अपने आसपास गंदगी देख वह फिर से à¤à¤—वान से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करता है और कहता है – हे à¤à¤—वन, मà¥à¤à¥‡ कब बाहर निकालोगे? सà¤à¥€ पर दया करने वाले ईशà¥à¤µà¤° ने मà¥à¤à¥‡ ये जà¥à¤žà¤¾à¤¨ दिया है, उस ईशà¥à¤µà¤° की मैं शरण में जाता हूं, इसलिठमेरा पà¥à¤¨: जनà¥à¤®-मरण होना उचित नहीं है
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